स्त्री पर्व
धृतराष्ट्र का शोक – जीवन और मृत्यु पर विदुर की शिक्षा
Dhritarashtra's Grief – Vidura Speaks of Life and Death
कौरव सेना के विनाश और पुत्रों की मृत्यु से धृतराष्ट्र शोक और अपराधबोध में डूब जाते हैं। पाण्डव विजय उन्हें उन निर्णयों के परिणामों से सामना कराती है जिन्हें वे बार-बार रोक नहीं पाए।
विदुर अनित्यता, भाग्य, कर्म और मृत्यु की अनिवार्यता पर विचार देकर उन्हें सांत्वना देते हैं। वे कहते हैं कि असहनीय शोक के बीच भी विवेक नहीं छोड़ना चाहिए।
यह शिक्षा जिम्मेदारी को मिटाती नहीं। वह केवल यह स्मरण कराती है कि शोक मृतकों को लौटा नहीं सकता और जीवित लोगों के बीच अभी भी कर्तव्य शेष हैं।
इस प्रकार स्त्री पर्व रणनीति और अस्त्रों से ध्यान हटाकर यह प्रश्न उठाता है कि मनुष्य अपने ही निर्मित विनाश के बाद कैसे जीवित रहे।