भीष्म पर्व
युद्ध का आरम्भ – कुरुक्षेत्र पर अशुभ संकेत
The War Opens – Portents Over Kurukshetra
सभी कूटनीतिक प्रयास विफल होने के बाद कुरु और पाण्डव सेनाएँ कुरुक्षेत्र में आमने-सामने खड़ी होती हैं। एक ही राजवंश के आत्मविनाश की आशंका वातावरण पर छा जाती है।
संजय प्रकृति और आकाश में दिखाई देने वाले भयावह संकेतों का वर्णन करते हैं। ये शकुन आने वाले युद्ध को कुछ राजाओं की महत्वाकांक्षा से कहीं बड़ा विनाश बताते हैं।
युद्धभूमि को न देख सकने वाला धृतराष्ट्र सत्य समाचार के लिए संजय पर निर्भर है। उसके प्रश्नों में पुत्रों के लिए भय और पुराने निर्णयों के अब न पलट सकने की चेतना दिखाई देती है।
आरम्भ से ही मुख्य तनाव स्पष्ट है: सेनाएँ कार्य के लिए तैयार हैं, पर उस कार्य की नैतिक कीमत को अब अनदेखा नहीं किया जा सकता।