सभा पर्व
सभाक्रिया – मय द्वारा निर्मित अद्भुत सभा
Sabhakriya – Maya Builds the Great Assembly Hall
खाण्डव वन दहन में अर्जुन ने मय दानव के प्राण बचाए थे। कृतज्ञ मय अपनी अद्भुत शिल्पविद्या से सेवा करना चाहता था। अर्जुन ने अपने लिए प्रतिफल नहीं लिया, इसलिए कृष्ण के सुझाव पर मय युधिष्ठिर के लिए अनुपम सभा बनाने को तैयार हुआ।
यह कोई साधारण राजमहल नहीं था। दुर्लभ रत्न, स्फटिक, धातुएँ और चमकदार पदार्थों से बनी सभा में ऐसी स्थापत्य-माया थी कि भूमि जल और जल चमकती भूमि जैसा दिखाई देता था।
विशाल प्रांगण, चमकते स्तम्भ, उद्यान और जलाशय सभा को अपूर्व वैभव देते थे। वह पाण्डवों की नई राजधानी इन्द्रप्रस्थ की उन्नति और समृद्धि का प्रतीक बनी।
सभा पूर्ण होने पर युधिष्ठिर ने ब्राह्मणों, ऋषियों, राजाओं और संबंधियों को बुलाकर शुभ अनुष्ठानों के साथ प्रवेश किया। दान, वेदघोष, संगीत और सत्कार से इन्द्रप्रस्थ उत्सवमय हो उठा।
मयसभा पाण्डवों की सफलता का प्रतीक थी, लेकिन यही वैभव आगे दुर्योधन की ईर्ष्या बढ़ाने वाला था। इस प्रकार यह भविष्य के राजनीतिक संकट का मंच भी बन गई।