कर्ण पर्व
कर्ण बने सेनापति – सोलहवें दिन की शुरुआत
Karna Takes Command – The Sixteenth Day Begins
द्रोण की मृत्यु के बाद कर्ण कौरव सेना का सेनापति बनता है। वर्षों से उसने दुर्योधन को अर्जुन को पराजित करने का वचन दिया था; अब वही वचन युद्ध के केंद्र में आ खड़ा होता है।
कर्ण अपने अस्त्रों और युद्धकौशल पर विश्वास के साथ नेतृत्व संभालता है, लेकिन कौरव सेना भीष्म, द्रोण और अनेक महायोद्धाओं को पहले ही खो चुकी है। उसका सेनापतित्व भारी दबाव में आरम्भ होता है।
सोलहवें दिन कर्ण पाण्डव सेना पर प्रबल आक्रमण करता है। भीम, अर्जुन, सात्यकि, द्रौपदी के पुत्र और अन्य योद्धा पंद्रह दिनों के रक्तपात से थकी रणभूमि पर उसका सामना करते हैं।
इसलिए कर्ण पर्व नई सेनाओं से नहीं, बल्कि शोक, प्रतिज्ञाओं और संचित वैर को लेकर अंतिम चरण में प्रवेश करते जीवित बचे योद्धाओं से शुरू होता है।